बुधवार, 25 अप्रैल 2012

कड़वा करेला हूँ 

मैंने तो मांगा था बस टेबल का एक कोना 
ये नहीं था कहीं से भी चांदी का या फिर सोना 
ऊपर से नहीं था यह  कहीं से भी आपका 
मगर क्या कर सकता हूँ मैं उस शाप का 
जिसे झेल रहा हूँ बस झेलने के लिए 
क्या जीवन ही बना है बस खेलने के लिए ?
वाणी से तो आप मधुर हैं पर क्या करें व्यवहार का 
जवाब नहीं है अपने अनोखे सरकार का 
रौनक होती होगी महफ़िल में मगर मैं अकेला हूँ 
 माफ़ करना मेरे मालिक मैं तो कड़वा करेला हूँ ।।
बदले जो व्यवहार 

सबकी अपनी किश्मत है सबकी एक कहानी
लेकिन सब अनमोल हैं सबके सब गुनखानी
सबके सब गुनखानी खेल विधाता की है न्यारी
कोई तो संतुष्ट स्वयं  में कोई सदा दुखारी
दीन नहीं वह भी  मगर जाने यह संसार 
सूरज सा चमके अगर बदले जो व्यवहार ।। 

रविवार, 19 फ़रवरी 2012

आजादी का क्या मतलब इन नेताओं को

आजादी का क्या मतलब है , पूछो इन नेताओं से
देश धर्म को  भूल गए जो , सत्ता के क्रेताओं से
लूट रहे हैं कदम कदम पर जनता में बदहाली है
बाँट रहे हैं हर दिन हर पल पाकेट सबका खाली है
इनकी करनी इतनी काली शुभ चिन्तक बतलाते हैं
भडकाते हैं हर दिन ज्वाला हरदम हमें सताते हैं
नहीं अछूता बचा है कोई सत्ता के क्रेताओं से
आजादी का क्या मतलब है पूछो इन नेताओं से


बढती जाती है महंगाई बंद सभी की आँखें हैं 


शनिवार, 18 फ़रवरी 2012

आगामी परीक्षा के लिए शुभ कामनाएँ

...सफलता मिले जो तुम्हें मन को भाये
......जीवन में खुशियाँ हीं खुशियाँ समाये
...........प्रभु की कृपा से बढ़ो आगे हर दिन
...............परीक्षा हो ऐसी जो अव्वल बनाए
बेस्ट ऑफ़ लक फॉर योर एक्जाम्स

शुक्रवार, 17 फ़रवरी 2012

दुनियाँ करे प्रणाम

सपने हों पुरे सभी मिले सफलता रोज
ओजस्वी जीवन मिले करो नए नित खोज
करो नए नित खोज खनकती रहे हव़ा में वाणी
'विधि' सम्मत सब काम करो तुम करना ना मनमानी
देते हैं आशीष निरंतर विधना हो अनुकूल
काँटों के आने से पहले पथ में बिखरे फूल
दिवा स्वप्न देखो नहीं भूल न होने पाए
करना न कोई काम कभी जो पीछे मन पछताए
आगे ईश्वर की कृपा बने निरंतर काम
इतने ऊँचे जा पहुँचो की दुनियाँ करे प्रणाम

सोमवार, 12 दिसंबर 2011

जीवन जैसे बुलबुला



जीवन जैसे बुलबुला


चार दिनों का वक्त मिला


उसकी चाहत चलती जाये


पल में पानी में मिला


जीवन जैसे बुलबुला

बुधवार, 7 दिसंबर 2011



कहाँ से चले हम कहाँ आ गये हैं ?


नहीं कुछ पता हम कहाँ जा रहे हैं


मंजिल मिले या भटकना पड़े पर ,


पहुंचना है एक दिन जहां जा रहे हैं



मेरे बारे में