गुरुवार, 26 अप्रैल 2012

खुल कर जी लो यार 

मरने से डरने वाके क्या ख़ाक जीवन जी सकेंगे ?
जीवन है अमृत का प्याला  खाक अमृत पी सकेंगे ?

हर सफ़र डर कर गुजारा कहते फिरते शेर दिल 

आ गई बिपदा जरा सी खोजते चूहे का बिल 

क्या हुआ हम जो नहीं कोई तो होगा मंच पर

राह मे मिल जाए दुश्मन उससे भी हँस हँस कर मिल

दुश्मनों से दुश्मनी कर ख़ाक जीवन जी सकेंगे ?
जीवन है अमृत का प्याला  खाक अमृत पी सकेंगे ?

हम हमारे में डूबे पर कहते हैं हम आपके 

पुण्य का परचम हाथों में काम करते पाप के 

राम के हीं नाम पर कितनों ने करतब कर डाले 

कर्म अपना छोड़ कर क्यों दंश झेलें शाप के 

शाम जो ढल जाएगी क्या ख़ाक जीवन जी सकेंगे ?
जीवन है अमृत का प्याला  खाक अमृत पी सकेंगे ?

जीना है जो जीवन पलभर जी भर कर जी लेने दो
पीना है अमृत  का प्याला जी भर कर पी लेने दो 

हों नहीं मदहोश लेकिन कल की सोचें आज हीं 

होश हो अब हम सफ़र पर जोश भी भर लेने दो 

परदेशी पाठक कहता है खुल कर जी लो यार ।
काम यहाँ कर जाओ ऐसे जाने यह संसार ।।

बुधवार, 25 अप्रैल 2012


काश की हम पंछी बन जाते

काश की हम पंछी बन जाते
नील गगन में उड़ते जाते
सीमा सरहद कुछ न होता
हँसते गाते बस मुस्काते
काश की हम पंछी बन जाते

कुदरत का अनमोल खजाना
मकसद होता उसे सजाना
शाम सुहानी सबकी होती
गुन गुन गाते न घबराते
काश की हम पंछी बन जाते

बगिया होती सबको प्यारी
सबके सब होते अधिकारी
करते चुहल कभी आपस में
अपनों को हंस कर अपनाते
काश की हम पंछी बन जाते

अपनी सबको आज पड़ी है
अनचाही दिवार खड़ी है 

इतने ऊँचे पहुँच नहीं पर ,
पर होते तो पार कराते
काश की हम पंछी बन जाते
कड़वा करेला हूँ 

मैंने तो मांगा था बस टेबल का एक कोना 
ये नहीं था कहीं से भी चांदी का या फिर सोना 
ऊपर से नहीं था यह  कहीं से भी आपका 
मगर क्या कर सकता हूँ मैं उस शाप का 
जिसे झेल रहा हूँ बस झेलने के लिए 
क्या जीवन ही बना है बस खेलने के लिए ?
वाणी से तो आप मधुर हैं पर क्या करें व्यवहार का 
जवाब नहीं है अपने अनोखे सरकार का 
रौनक होती होगी महफ़िल में मगर मैं अकेला हूँ 
 माफ़ करना मेरे मालिक मैं तो कड़वा करेला हूँ ।।
बदले जो व्यवहार 

सबकी अपनी किश्मत है सबकी एक कहानी
लेकिन सब अनमोल हैं सबके सब गुनखानी
सबके सब गुनखानी खेल विधाता की है न्यारी
कोई तो संतुष्ट स्वयं  में कोई सदा दुखारी
दीन नहीं वह भी  मगर जाने यह संसार 
सूरज सा चमके अगर बदले जो व्यवहार ।। 

रविवार, 19 फ़रवरी 2012

आजादी का क्या मतलब इन नेताओं को

आजादी का क्या मतलब है , पूछो इन नेताओं से
देश धर्म को  भूल गए जो , सत्ता के क्रेताओं से
लूट रहे हैं कदम कदम पर जनता में बदहाली है
बाँट रहे हैं हर दिन हर पल पाकेट सबका खाली है
इनकी करनी इतनी काली शुभ चिन्तक बतलाते हैं
भडकाते हैं हर दिन ज्वाला हरदम हमें सताते हैं
नहीं अछूता बचा है कोई सत्ता के क्रेताओं से
आजादी का क्या मतलब है पूछो इन नेताओं से


बढती जाती है महंगाई बंद सभी की आँखें हैं 


शनिवार, 18 फ़रवरी 2012

आगामी परीक्षा के लिए शुभ कामनाएँ

...सफलता मिले जो तुम्हें मन को भाये
......जीवन में खुशियाँ हीं खुशियाँ समाये
...........प्रभु की कृपा से बढ़ो आगे हर दिन
...............परीक्षा हो ऐसी जो अव्वल बनाए
बेस्ट ऑफ़ लक फॉर योर एक्जाम्स

शुक्रवार, 17 फ़रवरी 2012

दुनियाँ करे प्रणाम

सपने हों पुरे सभी मिले सफलता रोज
ओजस्वी जीवन मिले करो नए नित खोज
करो नए नित खोज खनकती रहे हव़ा में वाणी
'विधि' सम्मत सब काम करो तुम करना ना मनमानी
देते हैं आशीष निरंतर विधना हो अनुकूल
काँटों के आने से पहले पथ में बिखरे फूल
दिवा स्वप्न देखो नहीं भूल न होने पाए
करना न कोई काम कभी जो पीछे मन पछताए
आगे ईश्वर की कृपा बने निरंतर काम
इतने ऊँचे जा पहुँचो की दुनियाँ करे प्रणाम

मेरे बारे में