शनिवार, 18 फ़रवरी 2017

         

                                











आदर दो जब बड़ों को छोटों को भी प्यार  |

उस दिन देखो हो जाएगा दुनिया का श्रृंगार ||

वोट

वोट उसी को दीजिये जिसका दमन साफ |
वर्ना आने वाली पीढ़ी नहीं करेगी माफ़ ||

मंगलवार, 12 अगस्त 2014

फिजूल खर्ची 
एक दिन एक कंजूस आदमी अपने बेटे के लिए एक चश्मा लेकर आया । दूसरे दिन वह बैठा कुछ सोच रहा था । 
कंजूस :  क्यों बेटे क्या तुम पढ़ाई कर रहे हो ?
बेटा : नहीं पिताजी । 
कंजूस : क्या कुछ लिख रहे हो ? 
बेटा  :  नहीं पिताजी । 
कंजूस : (गुस्से से ) तुम्हारी यही फिजूल खर्ची मुझे पसंद नहीं । यदि कुछ नहीं कर रहे तो चस्मा उतार कर रख क्यों नहीं देते ?  

शुक्रवार, 18 जुलाई 2014

गुरुवार, 5 दिसंबर 2013

 सोमालिआ के पथ पर भारत 


दुनियाँ में आये  हैं तो जीना हीं पडेगा | 
जीवन है अगर जहर तो पीना हीं  पडेगा ॥ 

 हाँ , आज  भारत कि स्थिति कुछ ऐसी हीं हो गई है  । 
 कहने को हम उन्नति के पथ पर अग्रसर हो रहे हैं,
 परन्तु निरंतर इसका उलटा होता जा रहा है ।
 कहाँ तो हम महा  चले थे , वहीँ डालर ने एक झटके
 में हमें जमीन पर ला पटका,  और हमारा रुपया औंधे 
मुंह पड़ा कराह रहा है । आज बैठे बिठाये हमारी क्रय शक्ति 
में २५% कि कमी आ गई ।  ........ aur bhi

बुधवार, 27 मार्च 2013

सी . बी . आई.

आई आई सी . बी . आई.

बच कर रहना मेरे भाई 

जय हो जय हो जय कांग्रेसी 


जय जय बोलो सोनिया माई ॥ 



जो नहीं हुआ यहाँ नतमस्तक 

अपना हो या हो कोई दत्तक 


समझो आई उसकी शामत

 
फन फैलाता है यह तक्षक


समझ स्वयं आका के तेवर 


पकडे उन सबकी परछाई 


जय हो जय हो जय कांग्रेसी 


जय जय बोलो सोनिया माई ॥


मान गए मनमोहन प्यारे 

हर दिन देखे नए नज़ारे

पिघल गए करुणा के तेवर

मस्त मुलायम भी अब हारे

छापा में छप गए स्तालिन

अखिलेश्वर ने रह बनाई

जय हो जय हो जय कांग्रेसी

जय जय बोलो सोनिया माई ॥


नत मस्तक रहती है माया

पड़ी है जब से उस पर साया

छापा से पहले दस जनपथ

जाकर उसने अलख जगाया

राजनीति की रीत पुरानी

इंदिरा जी ने स्वयं बनाई

जय हो जय हो जय कांग्रेसी

जय जय बोलो सोनिया माई ॥

गुरुवार, 21 फ़रवरी 2013

काँग्रेसी भाई


महंगे डीजल ने किया सबका काम तमाम 

दिन महीने हर पखवाड़े बढ़ता जाए दाम 


बढ़ता जाए दाम दया के पत्र बने हम सारे 


सरकारी निर्णय के आगे हम सब देखो हारे 


न जाने किस खेत की मूली मनमोहन की माया

 
छीन रहा सुख चैन सभी का उनकी पतली काया 


बजट से पहले बजट बनाया बजट बचाएं कैसे ?


आयेगा जब बजट बहादुर उससे बचेंगे कैसे ?


भ्रष्टाचार हुआ जो इतना कौन करे भरपाई ?


अब तुम वापस कभी न आना हे काँग्रेसी भाई ॥

मेरे बारे में