बुधवार, 22 अक्टूबर 2008
हमारे नेता
नहीं इमान है इनका नहीं भगवान् है इनका
तेरे पैसे पर पलते हैं तुम्हीं पर राज करते हैं
यही गुमान है इनका यही बरदान है इनका
कहीं दंगा करवाते है किसी का जहाज जलवाते हैं
यही पहचान है इनका यही दूकान है इनका
कहीं झोली फैलाते हैं कहीं गोली बरसाते हैं
बड़ा बिरान मन इनका बडा परेशान मन इनका
कभी संसद में आते हैं कभी परिषद् को भाते हैं
यही अरमान है इनका यही farmaan है इनका
कभी ये wada करते हैं कभी ये सौदा करते हैं
नहीं jubaan है इनका नहीं sammaan है इनका
बड़े हीं अच्छे lagte थे जिन्हें हम चाचा kahge थे
बड़ा गुमान thaa jinkaa बडा sammaan thaa jinkaa
अगर चाहते जीना हर पल
जीवन है एक जंग भयंकर इससे तो लड़ना होगा
अपने सपने हों सब सुंदर , ये सारा जग एक समंदर
ढूंढ़ रहे हम महज सीपियाँ लेकर गोते इसके अन्दर
अगर चाहते पाना मोतीइंतजार करना होगा
जीवन है एक जंग भयंकर इससे तो लड़ना होगा
जब जब आंधी तेज चलेगी दवाजे भी स्वतः खुलेगी
बनेगी रहें पर्वत पर भी बला जो आए सभी टलेगी
नैया टूटे किस्मत रूठे भवसागर तरना होगा
जीवन है एक जंग भयंकर इससे तो लड़ना होगा
आए जग में कितना लेकर किस्मत की कुछ रेखा लेकर
साथ नहीं कुछ जाने वाला फिर क्यों जियें रोना रो कर
होना है जो अटल रहेगा उन सबको सहना होगा
जीवन है एक जंग भयंकर इससे तो लड़ना होगा
मंगलवार, 17 जून 2008
आज की महंगाई
महंगाई झेलकर हम बरबाद हो रहे हैं
व्यवसाई जितने भी हैं आबाद हो रहे हैं
मिलती है छुट उनको आता है जो इलेक्सन
किसको नहीं पता पर नाबाद हो रहे हैं ॥
कैसे खरीदें घिया किस भाव लायें तोरी
घर में कहीं भी रख लो होती है सारी चोरी
मिलती नहीं है रोटी भर पेट आज सबको
अरहर बना नियामत खाते हैं थोडी थोडी ॥
चावल चना मिलेगा किस भाव ये न पूछो
कड़वा बडा करेला नहीं राजमा की सोचो
फल दूध को भी लाये कुछ दिन हीं हुए हैं
बच्चों की फिश इतनी बीएस बाल को हीं नोचो ॥
चलता रहा जो ऐसा बन जायेंगे भिखारी
अपने हीं आका कल को हो जायेंगे दुखारी
आ जायेंगे सड़क पर तारों की छांव लेकर
जागो जरा समय से इतनी विनय हमारी ॥
आए थे एक दिन वो बतलाने कोई कारन
होने भी दो ओलम्पिक कर लेंगे सब निवारण
बेकार रो रहे हो ख़ुद को जरा संभालो
चलकर के चीन देखो कैसा वहां का आलम ॥
जीने का हक हमारा छीनो न आज हमसे
अफ़सोस आज सबका कुछ रोष है तुम्हीं से
बातें बड़ी न करना वरना न सुन सकेंगे
खाने दो रोटी सबको कल्याण है इसी से ॥
फ़िर से भारत देश में
सत्य अहिंसा की धरती पर रहते थे पहले सन्यासी
अब तो पलते हैं आतंकी न जानें किस वेष में
होती हैं हत्याएं हरदिन बापू तेरे देश में ॥
करते हैं कन्या की पूजा नवरात्रों के आने पर
नारी का दर्जा है उंचा उनके बाहर आने पर
डर डर कर रहती हैं दोनों अपने ही परिवेस में
रोती हैं ललनाएं कितनी बापू तेरे देश में ॥
बुरा न देखो बुरा न सोचो बुरा न बोलो कहते थे
अपने अधिकारों की खातिर अनुशासन में रहते थे
तोड़ रहे हैं आज उसी को आकर कुछ आवेश में
अंधियारा गहराया अब तो बापू तेरे देश में ॥
कहाँ गया ईमान हमारा जिसके बल पर चलते थे
भूल गए बलिदान तुम्हारा जिसका दम हम भरते थे
बतला दो तुम कब आओगे वापस अपने देश में
इंतजार है बापू तेरा फ़िर से भारत देश में ॥
आज का युवा
मिची सी आँखें हरदम लाल
कान में छल्ला हाथ में बल्ला
बात करें वो खुल्लम खुल्ला
सुतवां ख़त और ठुड्डी काली
कपड़े जिनके जोकर वाली
कर में कंगन कान में फोन
कभी नहीं जो रहता मौन
डेटिंग वेटिंग बनती रहती
चलती गाड़ी कभी न रूकती
दिन भर रहती मुंह में चुइंगम
पूरब पश्चिम का हो संगम
मुंह खोलें तो डालें गुटका
कभी लगा लेते हैं सुटका
नृत्य करें और गायें गाना
बल्ले बल्ले ना रे ना ना
मोटी चेन तिरछे नैन
कभी न बोलें मीठे बैन
पिज्जा केक चले चहुँ ओर
इनका दिल बस मांगे मोर
नयन नशीले होठ रसीले
चाल चलें ये बल्ले बल्ले
सख्त जींस और टॉप है छोटा
मंद स्मित पर मन है खोटा
चले जमाने जग में माया
इनके जैसा युवा पाया ।
एक विचार
दोनों हीं सिक्के के दो पहलू हैं ।
जो काँटों की चुभन से घबरा जाए
वह फूलों की कोमलता का भी अधिकारी नहीं है ।