गुरुवार, 31 जनवरी 2013

आरक्षण की आग में जल गए     

          दीन-ईमान 

भ्रष्टाचारी सबके सब बन बैठे  

                                                 

                                          धनवान 

गुरुवार, 24 जनवरी 2013

















आदर दो जब बड़ों को छोटों को भी प्यार |

उस दिन देखो हो जाएगा दुनिया का श्रृंगार ||

मंगलवार, 22 जनवरी 2013

                                                         धर्म आचरण करने से व्यसन दूर हो जाते हैं । 
व्यसन मुक्त जीवन होने से बिगड़े भी बन जाते हैं ।।

सोमवार, 21 जनवरी 2013

                                                         



छोटे को छोटा नहीं , समझो आप सामान । 
न जाने किस रूप में देगा वह सम्मान ।।

शुक्रवार, 18 जनवरी 2013


                                                                   है विस्मयकारी स्थिति हर मन अचंभित है।।
                                                                    मनमोहन! उठो अब शस्त्राग्रह और युद्घ करो।
            शत्रु रण में खड़ा है, सारा भारत आंदोलित है।

गुरुवार, 17 जनवरी 2013

कांग्रेसी एजेंडा 

कलमाड़ी को वापस लाओ राजा करो बहाल ।
भ्रष्टाचार बढ़ाकर फिर से सबको करो बेहाल ।।
डीजल कर दो दुगने कीमत गैस बना दो भारी ।
जातिवादी अजगर छोडो कर लो सब तैयारी ।।
आरक्षण की आग जला कर संको अपनी रोटी । 
जनता का क्या ! हरदम रही है इसकी किस्मत खोटी ।।
चिंतन कर लो चांदी काटो क्यों कर चिंता करना ? 
अरबों खरबों बना लिया तो फिर  का  डरना  ?
है चुनाव चौदह में तबतक होगा नया  नजारा ।
त्राही त्राही मचने दो कुछ दिन देंगे तभी सहारा ।।
राजनीति कहते हैं इसको अर्थनीति का साथी ।
इसीलिए तो प्रजातंत्र बन गया भयंकार हांथी ।। 

शुक्रवार, 21 दिसंबर 2012

बदल भी डालो यह संसार



कन्यां तुम कमजोर नहीं क्यों सहन करोगी अत्याचार ?
बन कर काली आओ फिर से बदल भी डालो यह संसार ।। 
तुम जननी घर घर की ज्योति जीवन देने वाली हो , 
तुम बहना , बेटी भी तुम तो साथ निभाने वाली हो 
शर्म से आँखें झुक जाती हैं ह्रदय बिदारक दृश्यों से 
तुम हीं  सदा से इस धरती पर समता लाने वाली हो ।।
 भूल गई तुम अपनी शक्ति बढ़ने लगा है पापाचार 
बन कर काली आओ फिर से बदल भी डालो यह संसार ।। 

मंदिर में मूरत  की पूजा लगता महज दिखावा है 
मन में जिनके पाप भरा वे कहते क्या पहनावा है 
बातों की बतकही बनाने मीडिया में कितने आ बैठे 
चुप चुप अब तक मनमोहन जी इसका एक पछतावा है ।।
बेशक अपना या हो पराया करना होगा अब प्रतिकार 
बन कर काली आओ फिर से बदल भी डालो यह संसार ।। 

और न आंसू बहने दो अब उठा लो घुटनों से चेहरा 
जला दो दानव दल को पल में और न आँचल को लहरा 
लिख लो अपनी नई  कहानी बन कर झांसी की रानी 
रोग लगा जब इस समाज को डाल  दो इस पर एक पहरा ।।
हे दुर्गा दुर्मति शमन  कर सिखा दो सबको सद्व्यवहार 
हे काली मतवाली बन कर बदल भी डालो यह संसार ।। 

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